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P2P Lending में निवेश कर बैंक 10% अधिक ब्याज प्राप्त कर सकते हैं।

P2P Lending प्लेटफार्म की मदद से कमा सकते हैं आप बैंक से 10% ज्यादा पैसे इसमें निवेश करने की कुछ खास नियम जो आप के प्रिंसिपल अमाउंट में बढ़ा करा सकता हैं।

हम में से हर कोई अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए हम अपना पैसे बैंक में रखते हैं। लेकिन क्या आप को पता हैं की बैंक हमारे पैसे को किस प्रकार से उपयोग करता हैं और इससे पैसे कमाता हैं जिसमे से आप को 2 या फिर 3% बैंक आप को इसका ब्याज देता हैं। लेकिन यदि आप अपने उसी पैसे से 10% से भी अधिक ब्याज कामना चाहते हैं तो आप को P2P Lending के बारे में जानना हो और देखना होगा की ये आप के पैसे से आप को किस प्रकार पैसे बना के देता हैं।

P2P Lending क्या हैं?

यदि P2P lending (peer-to-peer lending) को सिंपल टर्म में समजे तो P2P एक ऐसा टूल हैं जहा एक व्यक्त किसी दूसरे व्यक्त को अपना पैसे लोन पर देता हैं जहाँ पर अच्छी ब्याज दर प्राप्त करता हैं। इस पूरे प्रोसेस में वित्तीय संस्थान का रोल सिर्फ एक फैसिलिटेटर के तौर पर होता है। यदि आप इसे बारीकी तौर पर देखा जाये तो P2P Lending RBI के दिए गए नियमो पर काम करता हैं।

P2P Lending Earning

P2P Lending कैसे काम करता हैं?

दरसल में अगर हम P2P को समजे तो यहाँ पर टोटल 3 लोग होते हैं जो इसके प्रॉसेस में रहते हैं:-

  • इन तीन लोगो के समूह में पहले व्यक्त वो होता है जो लोन लेना चाहता हैं।
  • दूसरा व्यक्त इस समूह का वो व्यक्त होता है जो लोन देना चाहता हैं।
  • अंततः समूह का तीसरा व्यक्त ये वो व्यक्त हैं जो लोन लेने तथा देने वाले को मिलवाता हैं।

इस प्रॉसेस को आगे बढ़ने के लिए लोन लेनदार कुछ का रजिस्ट्रेशन करता हैं जिसके बाद Fintech Platform लेनदार की सम्पूर्ण जानकारी तथा दस्ताबेज को वेरीफाई करता हैं जैसे क्रेडिट स्कोर, क्रेडिट हिस्ट्री, इनकम डिटेल, आधार और पैन जैसे आइडेंटिटी प्रूफ। इस प्रॉसेस में लेंडर भी उसी प्लेटफार्म पर रजिस्ट्रेशन करता हैं। इसके बाद प्लाटफॉर्म अपने नियम के अनुसार अमाउंट को अलग अलग लोगों में बनता हैं।

कितना सुरक्षित है P2P Lending का बिजनेस?

पियर टू पियर लेंडिंग RBI की गाइडलाइंस के हिसाब से काम करता है। NBFC के तौर पर रजिस्टर्ड कंपनी ही ये सर्विस दे सकती है। एग्रीगेटर यानी फिनटेक प्लेटफॉर्म बॉरोअर की जानकारी इकट्ठा करने और वेरिफाई करने के लिए जिम्मेदार होता है। डिफॉल्ट और उससे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आपके फंड को अलग-अलग जगह डिस्ट्रिब्यूट किया जाता है। साथ ही RBI ने लेंडर्स के लिए एक लिमिट भी तय की है। इसके मुताबिक कोई एक लेंडर सभी प्लेटफॉर्म को मिलाकर 50 लाख रुपये से ज्यादा का लोन नहीं दे सकता।

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